Thursday, February 23, 2012

बड़ी सी दुनिया

                 कभी कभी लगता है ये दुनिया कितनी बड़ी है और हम कितने छोटे से. बड़ी सी दुनिया, बड़े लोग, बड़ी बाते, बड़े सपने और बड़े काम. इन सभी बड़ी बड़ी बातो और बड़े बड़े कामो में हम छोटे से अपने मन को देख ही नहीं पाते और न ही सुन पाते है उस छोटे से मन की छोटी सी बात.
        बचपन में हम हमेशा चाहते है की हम जल्दी से बड़े हो जाये और बड़े हो जाने के बाद हम और बड़े होना चाहते है. बड़े होने की इस चाह में हम हमेशा भागते रहते है. पर  कभी फुर्सत में या कुछ ऐसे पलो में जब हम  अकेले हो, हमे अपना छोटा सा मन याद आता है. याद आती है वो छोटी छोटी बाते वो छोटी छोटी खुशिया जो अनायास ही हमे मुस्कान दे जाती है,  हमे अपने छोटे से मन के करीब ले जाती है.
      छोटे से मन की छोटी सी बातो पर मुस्कुराते हुए अचानक हमे याद आता है कि हमारे पास इतनी फुर्सत नहीं है कि हम अनायास ही मुस्कुरा सके. और एक बार फिर हम बड़ी सी दुनिया के बड़े बड़े कामो और बड़ी बड़ी बातो में उलझ जाते है. ये सोचकर कि फिर कभी फुर्सत में इन छोटी बातो पर मुस्कुराया जायेगा, पहले बड़ी सी दुनिया के साथ चलने के काबिल  हो लिया जाये.



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