Wednesday, February 24, 2010

एहसास

कुछ कहना था तुमसे,
 क्या ?
शायद कुछ ऐसा जिसके लिए शब्द नहीं है,
जिसका कोई अर्थ नहीं है,
कुछ अगर है तो वो है  मेरे एहसास .......

एहसास, मेरे कुछ ऐसे जज्बात जिन्हें बयां करना .....
शायद नहीं आता मुझे.....
वो एहसास वो जज्बात जिनकी वजह भी तुम और आरज़ू भी तुम ....

तुम..... पता नहीं समझते हो या नहीं मेरे अनकहे शब्दों को ....
अगर समझते  हो तो कभी फुर्सत से आना मेरे पास....
उन अनकहे शब्दों का अर्थ ढूढने .....
दोनों मिलकर चलेगे उन अर्थो को समझने .....

और अगर नहीं समझते तो कभी समझा नहीं पाउंगी तुम्हे ...
अपने अनकहे शब्दों का अर्थ .......

7 comments:

Amitraghat said...

"अच्छी भावाभियक्ति...."

प्रणव सक्सैना amitraghat.blogspot.com

Deepmala said...

'एहसास तो ऐसी कड़ी जो इन्सान को खुद से जोड़ता हैं '
अच्छा आपका एहसास

stylemaker said...

Sorry, I missed.

suresh parmar said...

વાહ શું કવિતા છે, આ કવિતાને માણ્યા પછી એટલું જ કહી શકાય કે...
कुछ कहना था तुमसे,
क्या ?
शायद कुछ ऐसा जिसके लिए शब्द नहीं है,
जिसका कोई अर्थ नहीं है,

Goldy said...

I have no word for your lines

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संतोष कुमार said...

अपने मन के भावो को आपने बड़ी ही खूबसूरती से कविता मैं बदल दिया ! बधाई !

राकेश कौशिक said...

"एहसास, मेरे कुछ ऐसे जज्बात जिन्हें बयां करना .....
शायद नहीं आता मुझे.....

तुम..... पता नहीं समझते हो या नहीं मेरे अनकहे शब्दों को ....
अगर समझते हो तो कभी फुर्सत से आना मेरे पास....
उन अनकहे शब्दों का अर्थ ढूढने .....
दोनों मिलकर चलेगे उन अर्थो को समझने ....."

वाह - मनोभावों की निश्छल प्रस्तुति - बहुत खूब - बहुत देर से पढ़ा लेकिन सुखद अनुभूति