Tuesday, September 22, 2009

'हिन्दी है हम'


क्या आप जानते है भारत की राष्ट्रीय भाषा कौन सी है ? बड़ा ही आसान जवाब है हिन्दी। क्या आप ये जानते है हिन्दी दिवस कब मनाया जाता है ? चलिए ये भी जान लेते है १४ सितम्बर को। ये दोनों जानकारियां तो सही है पर क्या इन दोनों का विरोधभास आपको नज़र नही आता ? यदि भारत की राष्ट्रीय भाषा हिन्दी है तो क्या उसे एक 'हिन्दी दिवस' समर्पित करके हमने अपना फ़र्ज़ राष्ट्रीय भाषा की ओर निभा दिया ऐसा हम सोच सकते है? जब हिन्दी दिवस आता है तब रेलियाँ निकाली जाती है,भाषण होते है,और सभी का हिन्दी प्रेम उस दिन छलक आता है और लगता है जैसे यदि आज ही हमने प्रयास करना शुरू नही किया तो हिन्दी की नैया डूबी ही समझो।
हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिबल ने हिन्दी को भारत की प्रत्येक शाला में अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा और जिस बात के लिए हमारा देश मशहूर है वो यानि की चर्चा और विरोधों का दौर शुरू हो गया। कई लोगो का मानना है की हिन्दी को अनिवार्य बनाने की कोई जरुरत नही है तो कई लोगो का मानना है की संपूर्ण शिक्षण हिन्दी में ही होना चाहिए। इन दोनों अतिशय विरोधी तर्कों के बीच फिर से आ फसीं है हमारी "राष्ट्रीय भाषा" हिन्दी। भारत विविध संस्कृत्तियों वाला देश है तो भाषा की विविधता होना सहज है। परन्तु हिन्दी को राष्ट्रीय भाषा के रूप में जो गौरव प्राप्त होना चाहिए उस गौरव की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है। फिर चाहे हम हिन्दी को अनिवार्य रूप से स्वीकार करे या सहजता से। हम हिन्दुस्तानी है और हिन्दी के बिना हर हिन्दुस्तानी अधुरा है। इसलिए हिन्दी भाषा का भारत के प्रत्येक राज्य में गौरव के साथ स्वीकार किया जाना चाहिए।हिन्दी किसी राज्य की भाषा न होकर समग्र भारत राष्ट्र की भाषा है। यदि आप अपने आप को एक हिन्दुस्तानी मानते है तो आप हिन्दी है। और एक हिन्दी होने के नाते हिन्दी के सम्मान का कर्तव्य हम सभी का है। यदि हम अपनी ही भाषा को सम्मान नही दे पायेगे तो विश्व हमे सम्मान कैसे देगा? दुसरो के सम्मान को प्राप्त करने के लिए जरुरी होता है की हम दुसरो का सम्मान तो करे ही साथ ही हमे स्वयं का सम्मान करने भी आना चाहिए। इसमे कोई शंका नही है की हमे विश्व की प्रतियोगिता का सामना करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय भाषा सीखनी ही चाहिए लेकिन उसका इतना मोह नही होना चाहिए की हम अपनी भाषा की बलि चढाकर उसे सीखे।अपनी जड़ो को काटकर कोई पेड़ भला विकास कैसे कर सकता है?

3 comments:

stylemaker said...

Good thinking.
Nice 'Call to Action' / Appeal.

Deepmala said...

Hindi hamari takat hai ,jnha me jiski jarurat hai
Hindi kisi ka guroor hai,kuchh logo ke liye borring jaroor hai,
Lekin hindi gaane ,gaane ke liye sabhi mashoor hai.
kalam ka bakhan kya karu,aapki kalam to toophan hai.

चंदन कुमार झा said...

बहुत ही सुन्दर आलेख प्रियंका । आपने बहुत हीं सही प्रश्नों को उठाया है । आपको नियमित लेखन की बहुत बहुत शुभकामनायें ।