Thursday, June 18, 2015

' I Speak ' again..

I begin again.. After a long break of 3 years & 4 months, I chose to write again n this time with New City, New Experiences n of course with New point of view for everything. The last time I posted was on February 24, 2012 n today on June 18, 2015,  I chose to post again after 40 months. 40 months n life has taken a full circle.. So I begin to write again. I chose to write again n I chose to live again.. I chose to express again.. I chose to 'Speak' again.. Again 'I Speak'.

Friday, February 24, 2012

हमारे एहसास

तुम्हारे साथ चलते चलते,
कुछ कहते कुछ सुनते, 
ज़िन्दगी नदी की तरह बहती है.....
                                                                               हर दिन हर रात ...
                                                                                हर सुबह हर शाम....
                                                                                हम यु ही चलते है साथ साथ....
कुछ कही बाते.....
कुछ अनकही बाते ...
और कभी बिना मतलब की बाते..
                                                                     ये बाते ये पल .....
                                                                     ये आज ये कल ... 
                                                                   तुम्हारे साथ सब कुछ खुबसूरत है .......

बिलकुल मेरे बचपन के सपने ..
'घोड़े पर राजकुमार आएगा' की तरह .......

Thursday, February 23, 2012

बड़ी सी दुनिया

                 कभी कभी लगता है ये दुनिया कितनी बड़ी है और हम कितने छोटे से. बड़ी सी दुनिया, बड़े लोग, बड़ी बाते, बड़े सपने और बड़े काम. इन सभी बड़ी बड़ी बातो और बड़े बड़े कामो में हम छोटे से अपने मन को देख ही नहीं पाते और न ही सुन पाते है उस छोटे से मन की छोटी सी बात.
        बचपन में हम हमेशा चाहते है की हम जल्दी से बड़े हो जाये और बड़े हो जाने के बाद हम और बड़े होना चाहते है. बड़े होने की इस चाह में हम हमेशा भागते रहते है. पर  कभी फुर्सत में या कुछ ऐसे पलो में जब हम  अकेले हो, हमे अपना छोटा सा मन याद आता है. याद आती है वो छोटी छोटी बाते वो छोटी छोटी खुशिया जो अनायास ही हमे मुस्कान दे जाती है,  हमे अपने छोटे से मन के करीब ले जाती है.
      छोटे से मन की छोटी सी बातो पर मुस्कुराते हुए अचानक हमे याद आता है कि हमारे पास इतनी फुर्सत नहीं है कि हम अनायास ही मुस्कुरा सके. और एक बार फिर हम बड़ी सी दुनिया के बड़े बड़े कामो और बड़ी बड़ी बातो में उलझ जाते है. ये सोचकर कि फिर कभी फुर्सत में इन छोटी बातो पर मुस्कुराया जायेगा, पहले बड़ी सी दुनिया के साथ चलने के काबिल  हो लिया जाये.



Friday, February 26, 2010

Amdavad celebrating 600th year...


 Ahmedabad 's 600th year starts from today according to Muslim Tavarikh.As an Amdavadi I feel proud to be a citizen of such a city which has such a splendid history.     

   Ahmedabad, the largest city of Gujarat, was its former capital. The city founded by Sultan Ahmad Shah in 1411 AD, lies on the bank of the Sabarmati river. Ahmedabad is known for its beautiful monuments of historical and archaeological importance. The elegant architecture of its mosques and mausoleums is a unique blend of Muslim and Hindu Styles.In 1487, Mahmud Begada, the Grandson of Ahmed Shah, enclosed the city with an outer wall of six miles in circumference and consisting of 12 gates,189 bastions and over 6,000 battlements to protect it from outside invader.

   Ahmedabad became an important business center during the Mughal period until the death of Aurangzeb in 1707, after which the Ahmedabad city again began to decline. The British seized Ahmedabad in 1818 and set up a number of textile mills here. Ahmedabad became the temporary capital of the state of Gujarat from 1960 to 1970. Gujarat's principal city is Ahmedabad (also known as Amdavad) and is one of the major industrial cities in India.In present Ahmedabad is commercial capital of Gujarat State.
 
  Ahmedabad in Gujarati called Amdavad is a city which has mixture of old and new.You can find historical monuments and new generation malls both side by side. It is same with Its people who are called Amdavadi. They preserve theire culture at the same time they also march toward the morden world. Amdavadis have special characteristics which could not be described in words for that you have to be with an Amdavadi.
 As an Amdavadi today on my city's birthday I want to wish my city a very happy birthday and very bright future. I just love my city ...........as I am pukka Amdavadi......

Reference:- GujaratGuideonline.com,www.ahmedabad.com

Wednesday, February 24, 2010

एहसास

कुछ कहना था तुमसे,
 क्या ?
शायद कुछ ऐसा जिसके लिए शब्द नहीं है,
जिसका कोई अर्थ नहीं है,
कुछ अगर है तो वो है  मेरे एहसास .......

एहसास, मेरे कुछ ऐसे जज्बात जिन्हें बयां करना .....
शायद नहीं आता मुझे.....
वो एहसास वो जज्बात जिनकी वजह भी तुम और आरज़ू भी तुम ....

तुम..... पता नहीं समझते हो या नहीं मेरे अनकहे शब्दों को ....
अगर समझते  हो तो कभी फुर्सत से आना मेरे पास....
उन अनकहे शब्दों का अर्थ ढूढने .....
दोनों मिलकर चलेगे उन अर्थो को समझने .....

और अगर नहीं समझते तो कभी समझा नहीं पाउंगी तुम्हे ...
अपने अनकहे शब्दों का अर्थ .......

Friday, January 29, 2010

Happy Journalism Day

    29 January is celebrated as 'Journalism Day' in India. On this very great day on which Journalism started inIndia as Newspaper,we should remember the person behind this. He was James Augustus Hicky who started the first Newspaper 'The Bengal Gazette'  in India on 29 January 1780. In that memory 29 January is celebrated as 'Journalism Day' in India.
   Hicky had an Idea on which he worked and planned to publish such a paper by which he can expose what is going on in society. His purpose of starting the newspaper was not very great but his Idea was really great.
Gazett was smaller in size compared to current newspapers.It was twelve inches in lenght and seven inches in breadth.It had only two sheets with three columns on each page.The circulation of newspaper was limited.It gave space to scandalous stories.Simuntanesly Gazett was also a tool to raise voice against the unlawful exercises of British Officers.Hicky irked Warren Hastings so much that a case of defametion was filed against Hicky and he was imprisoned, after that many other cases were filed against him.In last he was banished and died in mysterious situations.
 Today Indian Journalism has developed very well.We are second largest market in the world for Newspapers.So we should give tribute to the man who started the first newspaper in India.He dared to do something different and made a very large difference.He died but he left a very cultural heritage for Indian Journalism.He gave message that Journalists may be harrassed,attacked or imprisoned but journalism does not die. Hats off to Mr.James Augustus Hicky for giving us such a great heritage. Happy Journalism Day to all the democratic people of India.

Tuesday, September 22, 2009

'हिन्दी है हम'


क्या आप जानते है भारत की राष्ट्रीय भाषा कौन सी है ? बड़ा ही आसान जवाब है हिन्दी। क्या आप ये जानते है हिन्दी दिवस कब मनाया जाता है ? चलिए ये भी जान लेते है १४ सितम्बर को। ये दोनों जानकारियां तो सही है पर क्या इन दोनों का विरोधभास आपको नज़र नही आता ? यदि भारत की राष्ट्रीय भाषा हिन्दी है तो क्या उसे एक 'हिन्दी दिवस' समर्पित करके हमने अपना फ़र्ज़ राष्ट्रीय भाषा की ओर निभा दिया ऐसा हम सोच सकते है? जब हिन्दी दिवस आता है तब रेलियाँ निकाली जाती है,भाषण होते है,और सभी का हिन्दी प्रेम उस दिन छलक आता है और लगता है जैसे यदि आज ही हमने प्रयास करना शुरू नही किया तो हिन्दी की नैया डूबी ही समझो।
हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिबल ने हिन्दी को भारत की प्रत्येक शाला में अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा और जिस बात के लिए हमारा देश मशहूर है वो यानि की चर्चा और विरोधों का दौर शुरू हो गया। कई लोगो का मानना है की हिन्दी को अनिवार्य बनाने की कोई जरुरत नही है तो कई लोगो का मानना है की संपूर्ण शिक्षण हिन्दी में ही होना चाहिए। इन दोनों अतिशय विरोधी तर्कों के बीच फिर से आ फसीं है हमारी "राष्ट्रीय भाषा" हिन्दी। भारत विविध संस्कृत्तियों वाला देश है तो भाषा की विविधता होना सहज है। परन्तु हिन्दी को राष्ट्रीय भाषा के रूप में जो गौरव प्राप्त होना चाहिए उस गौरव की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है। फिर चाहे हम हिन्दी को अनिवार्य रूप से स्वीकार करे या सहजता से। हम हिन्दुस्तानी है और हिन्दी के बिना हर हिन्दुस्तानी अधुरा है। इसलिए हिन्दी भाषा का भारत के प्रत्येक राज्य में गौरव के साथ स्वीकार किया जाना चाहिए।हिन्दी किसी राज्य की भाषा न होकर समग्र भारत राष्ट्र की भाषा है। यदि आप अपने आप को एक हिन्दुस्तानी मानते है तो आप हिन्दी है। और एक हिन्दी होने के नाते हिन्दी के सम्मान का कर्तव्य हम सभी का है। यदि हम अपनी ही भाषा को सम्मान नही दे पायेगे तो विश्व हमे सम्मान कैसे देगा? दुसरो के सम्मान को प्राप्त करने के लिए जरुरी होता है की हम दुसरो का सम्मान तो करे ही साथ ही हमे स्वयं का सम्मान करने भी आना चाहिए। इसमे कोई शंका नही है की हमे विश्व की प्रतियोगिता का सामना करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय भाषा सीखनी ही चाहिए लेकिन उसका इतना मोह नही होना चाहिए की हम अपनी भाषा की बलि चढाकर उसे सीखे।अपनी जड़ो को काटकर कोई पेड़ भला विकास कैसे कर सकता है?